उत्तर आधुनिकतावाद का अर्थ
‘उत्तर आधुनिकतावाद’ को अंग्रेजी मे ‘Post Modernism’ कहा जाता है। और यह दो शब्दो से मिलकर बना है “उत्तर” और “आधुनिकता”। उत्तर (Post) शब्द का अर्थ “बाद में” होता है अंतः आधुनिकता के बाद का समय उत्तर आधुनिकता कहलाता है।उत्तर आधुनिकता को लेकर विद्वानों में मतभेद रहा है। कुछ विद्वान इसे ‘आधुनिकता’ की समाप्ति तो कुछ विद्वान इसे ‘आधुनिकता’ का विस्तार मानते है।
उत्तर आधुनिकतावादी विचारक “अर्नाल्ड टॉयनबी” आधुनिकता की समाप्ति की घोषणा करते हुए उत्तर आधुनिकता को आधुनिकता के बाद की स्थिति मानते हैं उन्होंने अपनी पुस्तक “ए स्टडी ऑफ हिस्ट्री” में कहा है कि आज से लगभग 120 वर्ष पूर्व सन् 1850 से 1875 के बीच आधुनिक युग समाप्त हो गया था।
उत्तर आधुनिकतावाद का विकास
उत्तर आधुनिकतावाद के विकास को समझने के लिए हमें निम्नलिखित को समझना जरूरी है:-1 पूर्व आधुनिकतावाद:- 11वीं शताब्दी से 16वीं शताब्दी तक के समय को पूर्व आधुनिकतावाद का समय कहा जाता है। इसे मध्यकालीन युग या अंधकार युग भी कहा जाता है क्योंकि इस समय के दौरान सब कुछ धर्म, चर्च या ईश्वर पर ही आधारित था और इसी मान्यता का फायदा उठाकर चर्च और राज्य समाज को अंधकार में रखते थे।
2. आधुनिकतावाद:- पूर्व आधुनिकतावाद के बाद जब मनुष्य में तर्क-वितर्क करने की क्षमता उत्पन्न हुई तो 17वीं शताब्दी में आधुनिकतावाद का दौर शुरू हुआ। इस काल में धर्म सुधार आंदोलन हुए और राज्य, ईश्वर या चर्च को ज्यादा महत्व न देकर व्यक्ति को ज्यादा महत्व दिया गया था क्योंकि व्यक्ति के पास विवेक (बुद्धि) होता है।
इस समय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज में बहुत विकास हुआ जिसके कारण नए-नए अविष्कार देखे गए और औद्योगिक क्रांति भी हुई थी।
3. उत्तर आधुनिकतावाद:- इस समय की शुरुआत 20वीं शताब्दी से मानी जाती है।
उत्तर आधुनिकतावाद की परिभाषा
1. जॉर्ज रिट्जर के अनुसार:- उत्तर आधुनिकता का मतलब एक ऐसे ऐतिहासिक काल से है जो आधुनिकता की समाप्ति के बाद प्रारंभ होता है। जिसमे समस्त कलाएँ है। और उन सभी कलाओं के प्रति सूक्ष्म दृष्टिकोण ही उत्तर आधुनिकता है।2. जेमेशन के अनुसार:- यह उत्तर आधुनिकता को पूँजीवाद के विकास की विशेष अवस्था मानते हैं। इसमें उन्होंने बहुराष्ट्रीय पूँजीवाद की अपेक्षा उपभोक्ता को विशेष महत्व दिया है।
3. कृष्णदत्त पालीवाल के अनुसार:- विज्ञान की दमनकारी खोजों से मुक्ति पाने के लिए जो विचार 19वीं शताब्दी के मध्य के बाद प्रस्तुत किया गया उससे उत्तर आधुनिकतावाद का आरंभ होता है।
4. गोपीचंद नारंग के अनुसार:- उत्तर आधुनिकतावाद किसी एक सिद्धांत का नहीं वरन् अनेक सिद्धांतों का नाम है। इसमें पहले से चली आ रही अनुपयोगी परंपराओं को खत्म किया जाता है। अतः उत्तर-आधुनिकता एक नई सांस्कृतिक अवस्था भी है, यानी आधुनिकता के बाद का युग उत्तर-आधुनिक कहलाएगा।
5. जगदीश्वर चतुर्वेदी के अनुसार:- उत्तर आधुनिकतावाद पृथ्वी पर एक नए युग की शुरुआत है। यह युग आधुनिकता को ख़त्म कर चुका है। उत्तर आधुनिकतावाद परिवर्तन के प्रति सचेत है।
उत्तर आधुनिकतावाद की मान्यताएँ / मूल सिद्धांत / प्रासंगिकता / महत्त्व / विशेषताएं
स्टीफन हिक्स ने अपनी पुस्तक "Postmodernism" में उत्तर आधुनिकतावाद की निम्नलिखित विशेषताओं का वर्णन किया है:-1. वास्तविक समाज:- उत्तर आधुनिकतावाद के विचारकों का मानना है कि जिस चीज में आप विश्वास करते हो वही चीज सत्य होती है और जो समाज आप देख रहे हो वही सत्य है इससे सर्वोच्च और कुछ नहीं होता है।
2. धर्म विरोधी:- उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार धर्म और ईश्वर जैसी कुछ चीज नहीं होती है ईश्वर केवल हमारे मन में होता है। अंतः उत्तर आधुनिकतावादी धर्म से संबंधित सभी चीजों का खुलकर विरोध करते हैं क्योंकि धर्म मनुष्य के विकास में एक बहुत बड़ी बाधा है।
3. समुदायों को महत्व देना:- उत्तर आधुनिकतावादी केवल एक व्यक्ति को नहीं वरन समुदाय को महत्व देते हैं क्योंकि प्रत्येक समाज में व्यक्ति समुदाय में ही अपना जीवन व्यतीत करता है।
व्यक्ति समुदाय से अपना जीवन अलग नहीं कर सकता है क्योंकि कभी ना कभी उस व्यक्ति को समुदाय की आवश्यकता जरूर पड़ेगी। अंतः प्राचीन काल से अब तक मानव समुदाय में ही रहता है।
4. भाषा का महत्व:- उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार भाषा का बहुत महत्व होता है क्योंकि भाषा केवल लिखने और पढ़ने के लिए ही नहीं होती है बल्कि भाषा हमें चीजों को समझने में भी मदद करती है।
भाषा एक ऐसा वरदान है जो हमारे सोचने की क्षमता में वृद्धि करता है और जिस भाषा को व्यक्ति नहीं समझ पाता है तो वह भाषा व्यक्ति के लिए फायदेमंद नहीं है।
5. क्रांति द्वारा परिवर्तन:- उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार जो पुरानी परंपराएं व्यक्तियों के उत्पीड़न के लिए चलती आ रही हैं उन्हें खत्म करने के लिए क्रांति करना चाहिए। क्योंकि यह रीति-रिवाज, परंपराएं, धर्म आदि व्यक्तियों को उनका विकास करने से रोकता है और उन्हें लक्ष्य से भटकाने का कार्य भी करता है।
6. शिक्षा का महत्व:- उत्तर आधुनिकतावादी धर्म या धर्मशास्त्र के शिक्षा को महत्व नहीं देते है बल्कि उस शिक्षा को महत्व देते हैं जिससे किसी पिछड़े वर्ग का विकास हो सके।
उत्तर आधुनिकतावादी शिक्षा के माध्यम से महिलाओ, गरीब और मजदूर जैसे पिछड़े वर्गों का विकास करना चाहते हैं इसलिए वह इन वर्गों के लिए शिक्षा को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं।
7. उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज:- उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार समाज में हो रहे उत्पीड़न को हमें उजागर करना चाहिए ताकि सब लोग मिलकर इस समस्याएं का हल निकल सके।
8. तर्क (Logic) का विरोध:- उत्तर आधुनिकतावादियों का मानना है कि तर्क का उपयोग हमेशा से मानव के ऊपर दबाव डालने के लिए होता रहा है इसलिए हमें तर्क को पूरी तरह से त्याग देना चाहिए।
तर्कता के कारण ही पूर्व आधुनिक काल में राज्य और चर्च ने मिलकर लोगों को अंधकार में रखा था और आधुनिक काल में कुलीन वर्ग ने गरीब मजदूर लोगों के ऊपर अत्याचार किए थे। अंतः तर्क का उपयोग एक मानव दूसरे मानव के ऊपर अपना दबाव बनाने के लिए करता है।
9. लोकातीत (Supreme Authority) का विरोध:- उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार स्वर्ग और नरक जैसा कुछ भी नहीं होता है क्योंकि जो हम देख सकते हैं वही सत्य है।
मनुष्य एक विवेक प्राणी है और उसे सही और गलत पता होता है इसलिए ईश्वर जैसी कोई भी चीज नहीं होती है जो मनुष्य को सही या गलत का मार्ग दिखा सके। अंतः उत्तर आधुनिकतावादियों के अनुसार ईश्वर मनुष्य के स्वयं अंदर होता है।
10. वैश्वीकरण का विस्तार:- उत्तर आधुनिकतावादी वैश्वीकरण को बहुत महत्व देते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बहुराष्ट्रीय कंपनी, अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तथा संस्कृति के प्रचार प्रसार पर भी बोल देते हैं।
उत्तर आधुनिकतावाद की आलोचनाएं या मूल्यांकन
1. उत्तर आधुनिकतावादी धर्म और ईश्वर का पूर्ण रूप से विरोध करते हैं परंतु आलोचकों का कहना है कि अगर समाज में धर्म नहीं होगा तो दुबारा नए धर्म की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।2. आलोचकों का कहना है कि उत्तर आधुनिकतावाद में सामाजिक संरचना की कही बात नहीं की गई है जबकि राजनीतिक सिद्धांत की दृष्टि से सामाजिक संरचना को महत्व दिया जाना चाहिए था।
3. उत्तर आधुनिकतावादी कहीं ना कहीं अपने विचारों में पिछड़े वर्ग का समर्थन करते हुए प्रतीत होते हैं परंतु पूंजीवादी विचारक इसकी आलोचना करते हैं।
4. आलोचकों के अनुसार उत्तर आधुनिकतावादी परंपराओं को बुरा मानते हैं और उन्हें ना अपनाने पर जोर देते हैं परंतु सभी परंपराएं बुरी नहीं हो सकती हैं।
5. आलोचकों के अनुसार उत्तर आधुनिकतावादियों ने कहीं भी पूर्ण रूप से सकारात्मकता पर बल नहीं दिया है और ज्यादातर नकारात्मकता पर ही बल दिया है।
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